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Nalanda Satish

Tragedy Inspirational

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Nalanda Satish

Tragedy Inspirational

फरमान

फरमान

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चंदे की खैरात पर सजती है दुकानें जिनकी

पसीने की कमाई का हमसे वह हिसाब है मांगते

लाशों की दीवारें बनाकर बनाया आभासी आभामंडल जिन्होंने

ईमानदारी और बहादुरी का हमसे वह सबूत हैं मांगते

खून की नदियां बहा दी मजलूम और बेबस लोगों की जिन्होंने

अमन और शांति का हमसे वह पैगाम हैं मांगते

किलकारियां बच्चों की गुंजी न आँगन में जिनकी

जिगर के टुकड़े का हमसे वह बलिदान हैं मांगते

चोर बाजारी में गुजरी तमाम हयात जिनकी

सत्यनिष्ठा की किताब का हमसे वह हिस्सा हैं मांगते

छिनकर खाने की आदत को हक़ समझा 'नालन्दा' जिन्होंने

लंगर लगाने का हमसे वह फरमान हैं मांगते



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