परख
परख
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किसी दूसरे से पहले कभी अपना लहजा परख लेना
यकीनन खुद पर शर्म ना आये तो कह देना
आसान होता है कितना इल्जाम लगाना औरों पर
गिरेबान में अपने झाँककर कुछ समझ ना आये तो कह देना
अपनी मर्जी को यूँ थोपना दुनिया पर कहाँ की अक्लमंदी
उल्टे पांव चली बात गर, तारे दिनमें ना दिखाई दिए तो कह देना
अनसुनी बद्दुआओं को मत करना नजरअंदाज
वक्त के उलट फेर में मुँह की ना खायी तो कह देना
तुम्हारी कारगुजारियों के चर्चे मशहूर हुए देश दुनिया में
घमंड और अहंकार ने चूर चूर चूर ना कर दिया एक दिन तो कह देना
इंसान हो तुम भी ख़ुदा नही समझा करो'नालंदा'
बिना आवाज लाठी ना चल गई एक दिन उसकी तो कह देना।
