STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

3  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

एक रात ढलेगी. .

एक रात ढलेगी. .

1 min
207

एक रात ढलेगी,

आंखों का दर्द सहेगी,

पतझड़ सी सुबह होगी,

सांसों का दम घुटेगी,

जिंदगी एक पहेली,

मौत इसकी सहेली,

बनती हस्ती का राग,

एक रात धुन मिटेगी,

एहसास जब होगा,

कोई तब साथ न होगा,

तेरी दशा खराब होगी,

वक्त की जब मार होगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy