STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Romance Tragedy

4  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Romance Tragedy

मेरा ग़म

मेरा ग़म

1 min
378

आखिर सजा के मुस्तहक़ हम ही क्यों हैं,

मोहब्बत में बेवफाई तुमने की ही क्यों है..

प्यार की शमा बुझ गयी,

और गम का धुआं उठता रहा..

नादान ए दिल जफ़ा हो गयी,

और इश्क़ मातम करता रहा,

तुम्हारे इश्क़ की शराब अब नशा नहीं करती,

दिल के मर्तबा जिंदगी हिसाब ए वफ़ा नहीं करती...

इश्क़ का गम मुसीबतों का पहाड़ है,

हँस हँस कर सहना बहुत बड़ी बात है..

मेरे बाद तू कितना बेबस मजबूर होगा,

पास होकर भी मेरा इश्क़ बहुत दूर होगा...


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance