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Rajit ram Ranjan

Abstract Romance


2.5  

Rajit ram Ranjan

Abstract Romance


मेरी डायरी के कोरे पन्नों पर

मेरी डायरी के कोरे पन्नों पर

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पता नहीं 

यूँ ही 

ना जाने 

क्यूँ, 

उसके आने का 

नजरिया, 

दिल की धड़कन को 

बढ़ाता था, 

उसके जिस्म की

खुशबू, 

मेरे जिस्म में 

आग दहकाती थी, 

मैं बन जाती थी 

आसमान, 

वो तारा बनकर 

मुझमें बिखर 

जाता था, 

मेरी डायरी के 

कोरे पन्नों पर 

उसका ही जिक्र 

आता था, 

मेरी बेचैनी देखकर वो

बनके बादल 

बरस जाता था, 

सर्द रातों में 

मेरे जिस्म की 

गलन को 

भरके अपनी बाँहों में 

मिटाता था, 

मेरे दर्द को देखकर 

अपनी आँखों से 

आँसू बहाता था, 

उसके आने का 

नजरिया, 

दिल की धड़कन को 

बढ़ाता था!


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