STORYMIRROR

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Tragedy

3  

Sudhirkumarpannalal Pratibha

Tragedy

इंतजार

इंतजार

1 min
123

इंतजार

की घड़ी

क्या यूं ही

चलती रहेगी

क्या कभी

रुकेगी भी

थकान सी

हो गई है

यू हीं अपलक

देखते देखते

पथरा सी गई है

आंखे

तुम्हारी राह

देखते देखते

इंतजार

की सुई

अब

चुभ सी

रही है

एक टीस

उठती है

बहुत ही

दर्द देता है

असहनीय

हो जाता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy