Sudhirkumarpannalal Pratibha
Abstract Fantasy Thriller
संयम मेंगुणबहुतहैसुनना धुननागुननासमझनाऔरफिरचुपरहनाऐसीगंभीरताभीड़सेअलगकरतीहैपुरुष को महापुरुष बनाती हैजोइसगुण मेंनिपूर्ण हैसहीमायनेमेंवोहींमानवहै
प्रेम
सही मायने में...
प्रेम और नफरत
प्रेम को परिभ...
नजरिया
कहानी की परिभ...
उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है। उस कमरे को खाली ही रहने देना, वो खाली कमरा, मुझे पूरी तरह जानता है।
वक्त का क्या मौका ये आए न आए, कि ढह चला है किला दरार के साथ। वक्त का क्या मौका ये आए न आए, कि ढह चला है किला दरार के साथ।
वो सिरहाने पड़ा सपना यह बड़ा शहर भी क्या चीज़ है ना ! वो सिरहाने पड़ा सपना यह बड़ा शहर भी क्या चीज़ है ना !
सृष्टि के संचालन में अहम् भूमिका है, एक पिता का होना ----------- सृष्टि के संचालन में अहम् भूमिका है, एक पिता का होना -----------
भक्तिमार्गी को राह मिलन की, 'काफ़िर' दिखला गया। भक्तिमार्गी को राह मिलन की, 'काफ़िर' दिखला गया।
तेरे हर सवाल का जवाब देना बाकी है अभी, जिंदगी तेरा कर्ज़ चुकाना बाकी है अभी। तेरे हर सवाल का जवाब देना बाकी है अभी, जिंदगी तेरा कर्ज़ चुकाना बाकी है अभी।
जो मन में आए, उसको कागज पर उतार दूं। आज मैं आजाद हूं, कुछ भी लिख सकती हूं। जो मन में आए, उसको कागज पर उतार दूं। आज मैं आजाद हूं, कुछ भी लिख सकती हूं।
ये फफककर रो पडेंगी बेआवाज देर तक रोती रहेंगी, इनके हिस्से का सुख बस इतना सा है। ये फफककर रो पडेंगी बेआवाज देर तक रोती रहेंगी, इनके हिस्से का सुख बस ...
कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते ! कोई अल्हड़ हँसता रहता है। देखे मैंने हरदिल बस्ते !
क्योंकि मैं केवल मिश्रण ही नहीं मिश्रित भी हूं। क्योंकि मैं केवल मिश्रण ही नहीं मिश्रित भी हूं।
कुछ देर लगी इस नए सबक को समझने में, काफी देर लगी सच्चे रिश्ते को समझने में। कुछ देर लगी इस नए सबक को समझने में, काफी देर लगी सच्चे रिश्ते को समझने में।
और मेरे अक्षरों में, तुम्हारे सुख को पलीता लगाते हुए तीखे सवाल हैं! और मेरे अक्षरों में, तुम्हारे सुख को पलीता लगाते हुए तीखे सवाल हैं!
विरासत विरासत
अपने बच्चे को गर्भनाल से अलग नहीं कर पाएगी। अपने बच्चे को गर्भनाल से अलग नहीं कर पाएगी।
ओ जाना फिर मैं क्यों बदलूँ अन्त मे बस मैं यही कहूँगा ना बदला हूँ ना बदलूँगा। ओ जाना फिर मैं क्यों बदलूँ अन्त मे बस मैं यही कहूँगा ना बदला हूँ ना बदलूँ...
मुझे मायका बनाना है अपनी ससुराल को मुझे मायका बनाना है अपनी ससुराल को
फिर अधिकतर शिल्प आगे बढ़ जाता है, लेकिन शिल्पकार नेपथ्य में रह जाता है। फिर अधिकतर शिल्प आगे बढ़ जाता है, लेकिन शिल्पकार नेपथ्य में रह जाता है।
मैं एक औरत हूँ जिससे संसार चल रहा है। मैं एक औरत हूँ जिससे संसार चल रहा है।
लोग कहते माँ मुझे पर मैं बड़ी असहाय हूँ॥ लोग कहते माँ मुझे पर मैं बड़ी असहाय हूँ॥
इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है। इसलिए घर के साथ-साथ रिश्तों में भी दीमक सी लगने लगी है।