Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Nisha Nandini Bhartiya

Abstract


5.0  

Nisha Nandini Bhartiya

Abstract


विवाह

विवाह

1 min 608 1 min 608

कहते हैं 

विवाह मिलन है 

दो आत्माओं का 

पर नहीं 


आज परिभाषा 

बदल चुकी है

मिलन नहीं बंधन है 

वह भी सिर्फ औरत का

बांध दिया जाता है उसे

पायल की जंजीरों से 

चूड़ियों की हथकड़ी से 


ताउम्र चारदीवारी की कैद में 

काम के बदले दिया जाता है 

दो समय का दाना पानी 

रौंदा जाता है 

उसके अंग-अंग को 

परिवार की बैलगाड़ी में 


जोत दिया जाता है 

चलती है सिर्फ 

मालिक के इशारे पर

उसके अरमानों को 

कुचल दिया जाता है 


किसी भी काम को

करने से पहले 

वह सिर्फ देखती है 

अपने मांग के सिंदूर को

माथे की बिंदिया को 

गले में पड़े फांसी के फंदे से 


मंगलसूत्र को 

अब प्रश्न उठता है 

यह विवाह किसका 

और किसके लिए है 

औरत को पिंजरे में 

बंद कर 


गुलाम बनाने के लिए 

आज कलयुग में 

आत्माओं से अधिक 

शरीर ही मिलते हैं 

वह भी औरत की 


इच्छा के विरुद्ध 

पंख काट कर उसे 

कैद कर दिया जाता है 

पिंजरे में 

इसी को दिया है नाम

विवाह का                      

हमने-तुमने 

और समाज ने।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Nisha Nandini Bhartiya

Similar hindi poem from Abstract