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Nisha Nandini Bhartiya

Inspirational


4.5  

Nisha Nandini Bhartiya

Inspirational


मन-तिमिर को दूर भगाएं

मन-तिमिर को दूर भगाएं

1 min 201 1 min 201


आओ मिल के दीप जलाएं

मन-तिमिर को दूर भगाएं।

प्रेम-प्रीति की ज्योति से 

धरणी का कण-कण महकाएं।


पर्व दिवाली का आया 

खुशियों का सागर लहराया।

उल्लासित हो पात-पात

धरती-अंबर सब महकाया।

जाति-धर्म की तोड़े भीत 

सबको अपना मीत बनाएं।

प्रेम-प्रीति की ज्योति से 

धरणी का कण-कण महकाएं।


देखो दीपों की अवली को

चमक रहीं हैं मिलकर साथ।

थक जाता है एक अकेला 

दूजा गर न निभाएं साथ।

कर पकड़ कर एक-दूजे का

राष्ट्र को नूतन बनाएं।

प्रेम-प्रीति की ज्योति से 

धरणी का कण-कण महकाएं।


निर्धन के घर जाकर देखो

तरस रहा अन्न बीज को। 

खोए दीप्त दिवाली में 

भूले तुम उनके गेह को।

थोड़ा अंश प्रकाश का

उनको भी चलकर दे आएं।

प्रेम-प्रीति की ज्योति से 

धरणी का कण-कण महकाएं।



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