Sudhirkumarpannalal Pratibha
Abstract Classics Inspirational
वो प्रेमहींहैजिसकाकोईजवाब नहींहैलाजवाबहैप्रेमइसधरापरअमृत साहैप्रेमबीमारकोसंजीवनीसाप्रेमतड़पकोआरामसाप्रेमदर्दकोदवासाप्रेमहरपरेशानीकाकाकाट हैप्रेम
प्रेम समर्पण ...
बेटी
रिश्तों का कम...
प्रेम सर्वव्य...
प्रेम निशब्द
प्रेम
विषम परिस्थितियों में भी, नहीं डगमगाना है, विषम परिस्थितियों में भी, नहीं डगमगाना है,
आज बदला जो जमाना, खुद से हारी चिट्ठियां। आज बदला जो जमाना, खुद से हारी चिट्ठियां।
आ मेरे संग कुछ बातें कर ले बिता ले कुछ कुछ छन। आ मेरे संग कुछ बातें कर ले बिता ले कुछ कुछ छन।
ईश्वर साक्षी हैं कुछ पैसे की एक गोली ही काफ़ी थी। ईश्वर साक्षी हैं कुछ पैसे की एक गोली ही काफ़ी थी।
तू हम सब का अस्तित्व है आत्मा तू ही शुद्ध तू ही परमेश्वर है। तू हम सब का अस्तित्व है आत्मा तू ही शुद्ध तू ही परमेश्वर है।
नवयुवको तैयार हो, जो चाहो मिल जाय। नवयुवको तैयार हो, जो चाहो मिल जाय।
इस द्वंद्व में हो जाती कई बार मैं आहत, मेरे मन में मन की महाभारत। इस द्वंद्व में हो जाती कई बार मैं आहत, मेरे मन में मन की महाभारत।
कोशिशें में द़र-बद़र करता रहूंगा, जब तक है जान लड़ता रहूंगा। कोशिशें में द़र-बद़र करता रहूंगा, जब तक है जान लड़ता रहूंगा।
और मैंने फिर इक शाम जाया कर दी ! और मैंने फिर इक शाम जाया कर दी !
इंसान कम सुनता है, ज्यादा भड़कता है। इंसान कम सुनता है, ज्यादा भड़कता है।
इस प्यारी सी प्रकृति में विलुप्त हो जाना चाहती हूँ। इस प्यारी सी प्रकृति में विलुप्त हो जाना चाहती हूँ।
खोजबीन में लग कर अपनी छान ये मानो सारे दल रहा है। खोजबीन में लग कर अपनी छान ये मानो सारे दल रहा है।
अब के बच्चे तो सुन ले अब से ये नयी कहानी। अब के बच्चे तो सुन ले अब से ये नयी कहानी।
मुझे अपना तो, रहने दो। मुझे समझौता ही रहने दो। मुझे अपना तो, रहने दो। मुझे समझौता ही रहने दो।
चाहे कुछ मिले या न मिले जहाँ में मुझको बस मेरा खुदा मिल जाए। चाहे कुछ मिले या न मिले जहाँ में मुझको बस मेरा खुदा मिल जाए।
कौन जानता कौन कब साथ छोड़ दे मीठी यादों का सिलसिला जारी रहे। कौन जानता कौन कब साथ छोड़ दे मीठी यादों का सिलसिला जारी रहे।
सपने बाकी कोई ना रहे बस उनकी यादें है। जिंदगी में कदम कदम पर मोड़ ही ज्यादे है। सपने बाकी कोई ना रहे बस उनकी यादें है। जिंदगी में कदम कदम पर मोड़ ह...
पाते हैं किनारा, मगर कहीं पहुँच नहीं पाते हैं। पाते हैं किनारा, मगर कहीं पहुँच नहीं पाते हैं।
बदलते मुखौटे न जाने कब अपने और कब पराये हैं। बदलते मुखौटे न जाने कब अपने और कब पराये हैं।
कँवलासित माँ वारिद मग। सिंदूरी बदन विलय जग॥ स्वर्णिम प्रभात आभा भव। कँवलासित माँ वारिद मग। सिंदूरी बदन विलय जग॥ स्वर्णिम प्रभात आभा भव।