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Chandramohan Kisku

Abstract Inspirational


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Chandramohan Kisku

Abstract Inspirational


प्यारी धरती

प्यारी धरती

1 min 307 1 min 307

तुम्हारी मिट्टी के चूल्हे में 

बचाकर रखो 

थोड़ी सी आग 

अपनी होंठ में बचाकर रखो 

थोड़ी सी मुस्कान 


कौन जाने कब पहुंचे 

तुम्हारे चौखट पर 

थका मंदा कोई पड़ोसी

माँगने के लिए थोड़ी सी आग 

जलाने के लिए चूल्हा 

और पाने को मुस्कान 

खुश रहने के लिए


तुम्हारी हथेली और अंगुलियों में 

बचाकर रखो थोड़ी सी उष्णता  

कौन जाने कब 

किसी दोस्त का ठण्ड से थरथर 

हाथ आगे बढ़ जायेगा

बचाकर रखो थोड़ी सी उष्णता 


अगले प्रजन्मों के लिए 

थोड़ी सी स्वच्छ पानी 

थोड़ी सी सुगंध, धरती की

बारूद की विषैला गंध से 

बचाकर रखो 


अपनी जंगल - पहाड़,

गाँव और नगर 

तुम्हारी वह नव अतिथि जब आएंगे 

इस धूल भरी धरती पर 

चलने- फिरने के लिए 


सुख- दुःख भोगने के लिए 

इस नीले आसमान में उड़ने के लिए 

तब वह आनंद के साथ कह सके 

इस प्यारी धरती में 

बहुत कुछ है उनके लिए।


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