STORYMIRROR

Achyut Umarji

Tragedy

3  

Achyut Umarji

Tragedy

देश

देश

1 min
149


चिंता की बात है...

रूपया बाजार में गिर रहा है...

एक डाॅलर के ८० रूपये मिल रहे हैं...

किसी को गर कोई भेंट देनी हो...

रूपये १००० के कम कुछ अच्छा ही नहीं मिलता...

बाहर मेहंगाई भी इतनी हो गई है...

गंवार की भाजी तक रूपये २० पाव मिलती है...

गंवार होते हुए भी इतनी महंगी है...

पूरा बाजार ही महंगा हो गया है...

और जरूरत और आवश्यकता में...

फर्क करना मुश्किल हो गया है...

और...

त्योहारों का समय नजदीक आ रहा है...

चिंता की बात है...

रूपया बाजार में गिर रहा है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy