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Achyut Umarji

Abstract

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Achyut Umarji

Abstract

।। बिछड़ना ।।

।। बिछड़ना ।।

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बिछड़ने का ग़म किसे नहीं होता...

ख्याल आया ३१ दिसंबर का...

कैसा लगता होगा उसे साल का बिछड़ जाना...।।१।।


ऐसा तो हर तारीख १ दिन का फर्क होता है...

और वो बिछड़ जाते हैं...

पर वो उसी साल के होते हैं...।।२।।


पर ३१ दिसंबर का ऐसा नहीं होता...

दिन खत्म होने पर साल ही बदल जाता है...

लोग नये साल का जश्न मनाते हैं...

और बेचारा ३१ दिसंबर...

साल के बिछड़ने पर....?

क्या लगता होगा उसे...।।३।।


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