STORYMIRROR

anita Kushwaha

Others

3  

anita Kushwaha

Others

कासे कहूँ

कासे कहूँ

1 min
359

कासे कहूँ सखी

दिल की चोट

कभी गम

कभी उलझन

आँख हो गयी

पुरनम

अनजानी कभी

पहचानी कभी

आवाज कहीं

छुअन कोई

गयी भीग

रात कभी

रही रोती

शबनम कहीं

इंतजार कहीं

वादा कोई

अपना कभी

सपना कहीं

सो गई

नींद कभी

चौक के

जाग गयी

सपना कभी

सुन सखी

पीर मेरी।


           


Rate this content
Log in