कासे कहूँ
कासे कहूँ
1 min
363
कासे कहूँ सखी
दिल की चोट
कभी गम
कभी उलझन
आँख हो गयी
पुरनम
अनजानी कभी
पहचानी कभी
आवाज कहीं
छुअन कोई
गयी भीग
रात कभी
रही रोती
शबनम कहीं
इंतजार कहीं
वादा कोई
अपना कभी
सपना कहीं
सो गई
नींद कभी
चौक के
जाग गयी
सपना कभी
सुन सखी
पीर मेरी।
