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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

चिलमन के पीछे से

चिलमन के पीछे से

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चिलमन के पीछे से दो नैन इशारे कर रहे 

तेरी इन कातिल अदाओं पे हजारों मर रहे 


कस कस के तीर चलाओ ना निगाहों से 

कट कट के जिगर दिलवालों के गिर रहे 


चिलमन के पीछे क्यों छुपे हो सामने तो आइये 

छुप छुप के हम पे वार क्यों ऐसे कर रहे 


लबों पे खेल रही हैं मुस्कुराहटों की शमशीरें

इस कारण आशिक नैन लड़ाने से भी डर रहे 


कितने भी सितम कर ले मगर देंगे हम यही दुआ 

ऐ जाने वफा, तू और तेरा हुस्न हमेशा अमर रहे।


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