STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Fantasy

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Fantasy

करवा चौथ बड़ी दुखदायी है

करवा चौथ बड़ी दुखदायी है

1 min
532

यह दिन साल में बस एक बार ही आता है 

जब हर घर की छत पर चांद नजर आता है 


हम जैसों के लिए बड़ी मुश्किल हो जाती है 

चारों तरफ हुस्न की बहारें ही नजर आती है 


दायें वाली को तो भगवान ने फुर्सत से बनाया है

बायें वाली का सौंदर्य तो मेनका से भी सवाया है 


सामने वाली खिड़की में तो चांद का टुकड़ा रहता है

पीछे वाली भाभी का मूड हमेशा ही उखड़ा रहता है 


हसीनों की महफिल सजती है घर की छतों पर 

हजारों बिजलियाँ सी गिरती हैं मर्दों के दिलों पर 


किसी की आंखें नशीली तो किसी की मुस्कान कातिल है

किसी की नागिन सी जुल्फों से दिल हमारा घायल है 


चांदनी भी शीतल नहीं कर पाती तपते दिल को 

ना कहीं चैन आये ना करार ही आये पल भर को 


ये करवा चौथ का त्यौहार बन गया दुखदायी है 

इसके कारण सारे आशिकों की शामत आयी है 



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy