STORYMIRROR

Vijay Kanaujiya

Fantasy

3  

Vijay Kanaujiya

Fantasy

सच में मेरा प्रेम यही है

सच में मेरा प्रेम यही है

1 min
375


रीति यही है नीति यही है

मेरी सच्ची प्रीति यही है

प्रेम से अभिसिंचित होना ही

सच में ही अनुभूति यही है..।।


मेरे मन की चाह यही है

अरमानों की राह यही है

तुम ही हो मेरे जीवन में

सच में मेरी चाह यही है..।।


तुम ही से जगमग जीवन है

तुम ही से हैं ये मुस्कानें

तुमसे ही है प्रेम विभूषित

सच मे मेरा प्रेम यही है..।।


प्रेम अलंकृत तुम से ही है

चाहत का श्रृंगार तुम्हीं से

हर अभिलाषा में तुम ही हो

सच में मन का भाव यही है..।।


रीति यही है नीति यही है

मेरी सच्ची प्रीति यही है

प्रेम से अभिसिंचित होना ही

सच में ही अनुभूति यही है..।।

सच में ही अनुभूति यही है..।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy