STORYMIRROR

Vijay Kanaujiya

Abstract

4  

Vijay Kanaujiya

Abstract

कर दो तुम मेरा उद्धार

कर दो तुम मेरा उद्धार

1 min
125

तुम मेरी रचना बन जाओ

बन जाऊँ मैं रचनाकार

सृजन सहज हो जाए मेरा

लिखना हो जाए साकार..।।


शब्द शिल्प में रसता दे दो

उसे अलंकृत कर दूँ मैं

मेरी कविता तुम बन जाओ

इतना बस कर दो उपकार..।।


छंद सोरठा दोहा लिख दूँ

बस मेरी उपमा बन जाओ

हो जाए फिर काव्य विभूषित

तुमसे है बस यही पुकार..।।


लेखन विधा मेरी बन जाओ

विधिवत हो जाए फिर कार्य

रूप रंग परिभाषित कर दूँ

आग्रह बस कर लो स्वीकार..।।


साधक मैं भी बन जाऊँ

साधना मेरी तुम बन जाओ

हो जाऊँ कृतज्ञ तुम्हारा

कर दो तुम मेरा उद्धार..।।

कर दो तुम मेरा उद्धार..।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract