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VIVEK ROUSHAN

Abstract

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VIVEK ROUSHAN

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जैसे तुम गए

जैसे तुम गए

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जैसे तुम गए वैसे कोई जाता है क्या 

जानेवाला लौट कर वापस आता है क्या


पराए तो पराए ठहरे उनसे क्या गिला

कोई अपना भी दिल दुखाता है क्या


शहर में लगी आग पानी बुझा जाता है

दिल में लगी आग पानी बुझाता है क्या


बात करने से ही तो बात बनती है जानाँ

बात न करने से सब ठीक हो जाता है क्या


तुम हर बात पे दूर जाने की बात करते हो

दूर चले जाने से कोई याद नहीं आता है क्या


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