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VIVEK ROUSHAN

Abstract


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VIVEK ROUSHAN

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खुदा हो जाए

खुदा हो जाए

1 min 117 1 min 117

 किसे खबर क्या पता कब कौन क्या हो जाए

यहाँ आदमी भी चाहता है की वो खुदा हो जाए


जिसने बोए हैं काँटे कदम-कदम पर राहों में

वे लोग चाहते हैं की फूल से खुशबू जुदा हो जाए


तुमने क्या सोचा तुमने क्या चाहा ये तुम जानो

मैंने तो बस इतना ही चाहा की तू मेरा हो जाए 


ख्वाब तो आते-जाते रहते हैं इन आँखों में

कभी तो ऐसा हो की जो ख्वाब देखूँ वो पूरा हो जाए



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