STORYMIRROR

दयाल शरण

Abstract

4  

दयाल शरण

Abstract

किरदार

किरदार

1 min
54

जिसका कथा में

जितना हिस्सा

उतना उसे 

निभाने दो


छोटे सा किरदार

भले हो

उसे अपनी कला

दिखाने दो।


रात को जब बैठो

तो कर लेना 

कोई हिसाब

पाना-खोना

मोती सा पिरोना


रंग लेना

मन का आकाश

अभी तो जो

प्रकृति से जनी है

उसको कण-कण छाने दो।


छूट गए कुछ लोग

भले ही साथ कभी

वो पलभर थे

टीसेंगे वे पल 

जब वे किरदार में

अपने चरम पर थे


विस्मृत से उनके

अभिनय को

याद कभी तुम

कर लेना


इस पल अपने 

जीवन को खुद का 

किरदार निभाने दो।


छोटे सा किरदार

भले हो

उसे अपनी कला

दिखाने दो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract