Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Baman Chandra Dixit

Abstract

5.0  

Baman Chandra Dixit

Abstract

तेरे जानेके बाद

तेरे जानेके बाद

1 min
252


कहाँ है वो सुकून तेरे जाने के बाद

फागु जो धो लिया मैंने फ़ागुन के बाद

पत्ते सूख गए कलियाँ मुरझा गयी

मौसम भी रूठ गया, तेरे जाने के बाद।


कलियों का खिलना डालियों का हिलना

बागों मे इतराती तितलियों से मिलना

भौरों के गुंजन कोयलिया की कूंजन

गुमसुम सा ये पवन, तेरे जाने के बाद।


एक पारिजात दूजा है ये पलास

पत्ते झड़ गए फ़िर भी ना उदास

डाली भर भर रंगों का पिटारा लिए

बैशाख-शाख-सवार तेरे जाने के बाद।


तड़पती धरती तपता सारा गगन

झुलसा आसमान जलता जल पवन

जेठ का पैठ अब भी तो है बाकी

चैत्र बैशाख विचित्र, तेरे जाने के बाद।


सावन को भी तो अभी आना ही होगा

तपन जलन का ज्वाला सहना होगा

तभी तो बरखा बूंदों में बंट कर

सींचेगी धरती, तेरे जाने के बाद।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract