STORYMIRROR

Babita Jha

Abstract Inspirational

3  

Babita Jha

Abstract Inspirational

प्रातःकाल

प्रातःकाल

1 min
351

प्रातःकाल की मधुर बेला में

सूरज ने ली अंगड़ाई

साथ में हवा के झोंके

चारों ओर बहाई

चिड़ियों की चहचहाहट से

इस वातावरण में नई उमंगें आई

कोयल की कूक, चिड़ियों की चहक से

जीवन में संचार समाई

लोगों का खिलखिलाना

हर ताल पर इठला ना

फिर से प्राणियों में

जीवंतता है आई

सभी शुरू हुए

जीवन की लालसा

चारों ओर हरियाली छाई

इसी उम्मीद भाव से 

आज यही धैर्यता है समाई



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract