STORYMIRROR

Babita Jha

Inspirational

4  

Babita Jha

Inspirational

आकाश

आकाश

1 min
274


खुले जहान में ढूंढ रही

अपना एक आकाश

जहाँ थोड़ी देर ठहर सकूँ

मिले कहीं प्रकाश

समय के साथ चलना ही

है जीवन का सारांश

मगर समय भी ना रूका तो

कहाँ मिलेंगे ये स्वच्छद सांस

कभी तो बदलेंगे ये रूप

है यही विशवास

क्या मिलेगा इस धरती पर

सभी लगाए यह आस

बढते जाना रूकना नहीं

लेकर एक मिसाल

चाहे आए लाख मुसीबत

कभी तो मिलेगा खुला आकाश!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational