STORYMIRROR

Babita Jha

Abstract

3  

Babita Jha

Abstract

सफर

सफर

1 min
208

फूल का जीवन चक्र देखा

मौसम के साथ बदलते देखा

पौधे में आये कली बनकर

खिली वह अठखेली बनकर

फिर समय का प्रहार आया।


               उस पर एक कहर है छाया

               आज उसे बिखरते देखा

               यही जीवन की काया

               फिर मौसम में बदलाव आया।


पौधे पर नन्ही कली की छाया

नन्ही नन्ही कली की छाया

चारों ओर नन्हे फूल खिल आये

जीवन में फिर बहार है छाये

समय का यही है माया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract