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Vijay Kanaujiya

Romance

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Vijay Kanaujiya

Romance

तुम दुःख मेरे नाम करो

तुम दुःख मेरे नाम करो

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202


प्रथम प्रेम का प्रथम निवेदन

तुम मेरा स्वीकार करो

पूरी हो मेरी अभिलाषा

बस थोड़ा उपकार करो..।।


मेरी चाहत के पन्नों पर

नाम तुम्हारा अंकित हो

प्रेम की स्याही से लिख दो तुम

बस मेरा ये काम करो..।।


मैं जीवन ये अर्पण कर दूँ

आदेश मुझे थोड़ा दे दो

हो प्रेम अंकुरित अपना भी

बस थोड़ा सा प्रयास करो..।।


मिले मुझे भी प्रेम आपका

प्रेम पुजारी मैं बन जाऊँ

अपना हर सुख मैं दे दूंगा

तुम दुःख मेरे नाम करो..।।

तुम दुःख मेरे नाम करो..।।



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