STORYMIRROR

AMAN SINHA

Drama Tragedy Fantasy

4  

AMAN SINHA

Drama Tragedy Fantasy

बेकरारी

बेकरारी

1 min
432

चले थे हम मंज़िल की तलाश में

पर जाना कहाँ है पता ही नहीं था 

वैसे तो कई वजह है रूक जाने की

मगर क्यों चले रहे है पता ही नहीं था 


क्यों चले जा रहे है हम ?

हासिल हमें करना है क्या ?

क्या राज़ छुपाया है जिंदगी ने

जान कर भी करना है क्या ?


न तबीयत साथ देती है

ना ही फितरत है हमारी

अगर जान भी जाए बाते कल की

कोशिश जवाब दे जाए हमारी


जब तक हम अंजान है

हम सब-के-सब इंसान है

अपने होने का पता चला तो

सब बन जाते शैतान है


भरोसा किसी का करें भी तो कैसे

तक़दीर हर पल बदलती है यहाँ

इन्सानों की तो बात ही छोड़ो

तस्वीरें रंग बदलती है यहाँ


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama