STORYMIRROR

शालिनी मोहन

Fantasy

3  

शालिनी मोहन

Fantasy

नींद

नींद

1 min
260


कई दफ़ा देखा है नींद को

अपनी आँखों के लबों से छूती है फुरसत को

आती है तकिये पर हर रात

 चुलबुली, शोख़ सी

अपनी तमाम बातें लेकर

पढ़ने को मेरी ख़ामोशी

और गुनगुनाने को मेरे गीत

छीन लेती है मेरे लबों से

शिक़वे गिले कई कई दफ़ा

छोड़ जाती है तकिये पर

ख़्वाब की चाशनी..


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy