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शशि कांत श्रीवास्तव

Action


4.8  

शशि कांत श्रीवास्तव

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हे-सुभगे

हे-सुभगे

1 min 235 1 min 235

हे प्रिये तुम हो सुभगे

एक जवान की जो

पहले जीता है देश की खातिर 

फिर जीता है परिवार की खातिर 


हम -तुम दोनों ही हैं सैनिक 

अपनी अपनी सीमा के 

जाते जाते गले मिले हम तुम 

पाकर इक अहसास प्यार का 


हँस कर विदा करो तुम सुभगे 

चलते हैं हम फर्ज निभाने को 

सौंप कर जिम्मेदारी इस घर की..प्रिये


आऊँगा मैं लौट कर इक दिन 

बाट जोहना इस देहरी पर तुम 

फिर होगा मिलन हमारा तुम्हारा 

इसमें  या  फिर  तिरंगे  में 

तुम हो सुभगे एक जवान की।


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