STORYMIRROR

शशि कांत श्रीवास्तव

Romance

4  

शशि कांत श्रीवास्तव

Romance

धवल चाँदनी की रजनी में

धवल चाँदनी की रजनी में

1 min
401

इस धवल चाँदनी की रजनी में

उपवन की कलियाँ चिटक रहीं हैं

शबनम की अमृत बूंदों से मिलकर,

कुछ पुष्प बने कुछ कली बनी,


जहाँ कमलिनी चमक रही है

वहीं रात की रानी महक रही है,

इस धवल चाँदनी की रजनी में,

फिर से जी लें,

यादों के उन स्वर्णिम पल को,


जो मन को कितना हर्षाते थे ,

पत्तों से छनकर आती वो किरणे 

कैसे खेला करती थीं -वो,

तुम्हारे अधरों और कपोलों से,

धवल चाँदनी की इस रजनी में

आओ --प्रिये...,


चलो..... चलें... उपवन में,

उम्र के इस दहलीज पर आकर,

फिर से जी लें.....

जीवन के उन मधुरिम पल को,

जीवन के उन मधुरिम पल को।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance