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Harshad Molishree

Drama Tragedy

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Harshad Molishree

Drama Tragedy

अनसुनी आवाज़

अनसुनी आवाज़

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कहीं से एक आवाज़ आई...

सब रास्ते अंधेरे मैं थे...


उजालों का दूर-दूर तक न था कोई वास्ता...

रोशनी की एक चमक नजर आई...


बन्दे की जान में जान आई...

रोशनी को खोज वह जब दूर निकल आया...


दूर आके भी उस चमक को कोसों दूर पाया....

अंधेरा मिटने का नाम नहीं ले रहा था...


रोशनी न थमने का...

बन्दे की जान अटकी है प्यास में...


रोशनी से न कोई वास्ता उसका...

फिर भी उसे पाने की आस है...


खोया जा रहा हर घड़ी उसकी लौ मैं...

अँधेरे ने एक दिन पूछा...


क्यों चाहता है उस रोशनी को

जो तुझसे दूर भागा करती है...


एक चमक दिखा कर

तुझे तन्हा छोड़ जाया करती है...


मैं भले उन उजालों से परे

पर तेरे करीब हूँ...


मान ले मुझे बस

अब मैं ही तेरा रक़ीब हूँ...


बन्दे ने आवाज़ लगायी

ऐ अंधेरे, ये पाने की चाहत...


नहीं गम का फ़साना नहीं

न तुझसे नफ़रत है...


न तुझसे कोई गिला

मान लिया जो तुझे रक़ीब...


मिल न पाऊँगा उजालों को कभी

अंधेरा बोला..??


मुझे ठुकराके

झूठी चमक को न आजमा...


यह छोड़ जायेगी

तब मेरे अलावा कोई और ना होगा...


उस रेश्मी चमक ने

ये सारे अलफ़ाज़ सुने...


क्यों नही मानता बात

अंधेरे ने यह सवाल किया...


बन्दे ने जवाब में अपने होठ हिलाये

जबान लड़खड़ाई...


और बन्दे ने ...?

बन्दे ने कहा...


जमाने में आये तो

आँखें बंद करके आये थे...


ज़माने से जाते हुए भी

आँखों में तुझ चमक को न भर पाऊँगा...


आँखें मीचे जहाँ मैं आया था

ऑंखें बंद करके जाऊँगा...


वफ़ा है ये अंधेरा

जो साथ था साथ लेकर जायेगा...


बेवफ़ा सही तू उजाले

मेरी मौत का पैगाम लायेगा...


फिर भी तेरा साथ चाहूँगा...

काले से बैर नही मगर तुझ से प्यार माँगूँगा...


मौत भी आये और तू साथ छोड़ जाएँ...

लेकिन तुझ मैं अपनी याद छोड़ जाऊँगा...


सुन के ये अंधेरा मुस्कुराया...

सुन के ये उजाला आँसुओं से खुद मैं डूब गया...


बन्दे को उठाकर

अपनी चमक की और ले आया...


फिर भी...

फिर भी...


पल दो पल की खुशियाँ दे कर

एक दिन अंधेरा आया...


दो हाथ फैलाकर साया माँगा...

बन्दे को अपनी और बुलाया...


हँसी ख़ुशी बन्दे ने आँखों ही आँखों

में चमक को ऐसे देखा


मन ही मन मुस्कुया....

आँखें जो बंद हुई न कभी


मुस्कान न आई कभी

उस बन्दे की सुबह हुई...


खो गया अंधेरो में कहीं....

याद भी नहीं आज उजालों को कहीं...


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