Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

एहसास

एहसास

1 min 234 1 min 234

एहसास के हम गलत है

एहसास कि हम नाकामयाब है

एहसास उनका कि वो लाजवाब है

पर हम तो खुली किताब है।


एहसास नहीं के कभी उन्हें पढ़ ना पाए

एहसास नहीं के गिर के संभल ना पाए

एहसास नहीं के बिछड़के मिल ना पाए

मगर हम तो अब भी उनके दिलदार है।


एहसास के वो शानदार है

एहसास के वो हमारे राहगार है

एहसास कि हमें उनकी तलाश है

एहसास कि वो अब इस राह से अनजान है

मगर शायद वो अब भी

उस बुझी हुई लौ को संभाले है।


एहसास की हम अब वो नहीं है

एहसास की जो साँस चलती थी

सिर्फ उनके लिए अब नहीं है

एहसास की घुटन में दब गई,


आरज़ू क्या ये कम नहीं है

एहसास की उन्हें एहसास नहीं है

हम भले कैसे भी है

अब उन्हें परवाह नहीं है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Harshad Molishree

Similar hindi poem from Romance