STORYMIRROR

Harshad Molishree

Tragedy

3  

Harshad Molishree

Tragedy

बस... कोरोना

बस... कोरोना

1 min
296


हवाएं आज कल कुछ दर्द भरी हैं

कइयों के दर्द को यह ये उड़ी हैं


मौत का मौसम चल रहा है

साँसें कईयों की अटकी पड़ी हैं


बोझ बन लग रहा है जिन

लोगों को घर पर क़ैद होना


ज़िन्दगी सैकड़ों लोगों की हाथों

में तुम्हारे आ पड़ी है


तो कुछ वक्त को पिंजरे में यूं रह के देखलो

कुछ वक्त को ये दर्द सह के देख लो


आने वाले पल में बेशक खुशियां होगी

कुछ वक्त ज़िन्दगी जीने के लिए घर पर रह लो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy