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Harshad Molishree

Abstract


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Harshad Molishree

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जीना अभी बाकी है

जीना अभी बाकी है

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गम ही गम है

खुशी भी है

मगर कम है

आसूं से आँखें नम है

हाँ होटों पर हँसी तो है पर जरा कम है

दिल में प्यार बेहद है

और दर्द के लिए अब जगह कम है

लोग तो अपने है

मगर पराये से कम नहीं है

पराये से भी नहीं

पराये भी नहीं ...

हालात थोड़ी खस्ता है

यादों का साथ पूरा बस्ता है

सहारा किसीका नहीं

मगर सबका सहारा बनता है

पाता कुछ नहीं

खोने को कुछ है ही नहीं

रोके से रुकता नहीं

छुपाने से छुपता नहीं

खूब जलालू रोशनी ये रोशन होता नहीं

सुनसान है सड़क डगर अंजान है

भीड़ मे तन्हा सही

मगर भीड़ मे, में अकेला तो ऐसा नहीं

उजाला उसको कभी भाता था

अब सिर्फ उजाले से घबराता है

अंधेरा भी कमाल है

ना उसको सताता है ना रुलाता

बेवजह ना जाने सारी रात जगाता है

साफ भी है माथे पर कुछ दाग भी है

ताक़त तो है मगर थोड़ा कमजोर भी है

लड़ना जानता है मगर लड़ाई से अनजान है

हथियार तो बहोत है मगर चलाने से घबराता है

दुवाएं भी है बददुवाएं भी है

अच्छा भी है बुरा भी है

सही भी है थोड़ा गलत भी है

यही तो जिंदगी है

अभी खत्म थोड़ी हुई है

जीना अभी बाकी भी तो है...



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