STORYMIRROR

Janardan Gore

Abstract

4  

Janardan Gore

Abstract

लाख गम

लाख गम

1 min
358

लाख गम

लाख गम हैं संग 

फिर भी जगी हैं उमंग

एक आस के साथ

की,पूरी होगी कोई बात !!१!!


थमी हैं कुछ पल सांस

मन में दबी हैं एक आस

सपने जगा कर हर दम

चलना हैं मिलाकर कदम से कदम !!२!!


जिंदगी में गमो की कमी नही

दुनिया चलती हैं, थमी नही

एक दिन हाथ आएगी खुशी

कहीं ना रहेगी फिर खामोशी !!३!!


लाख गम भी ना रहेंगे कही

रसते सब दिख जायेंगे सही

बस मिलनी चाहिए राह एक नयी

हर बात होगी फिर मन चाही !!४!!


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract