STORYMIRROR

Janardan Gore

Tragedy

4  

Janardan Gore

Tragedy

"पथराई आंखें"

"पथराई आंखें"

1 min
358


पथराई आंखें सुख की खोज में

आया दिन ढल गया,बात बात में

लाख कोशिश करके भी...

ना आयी कामयाबी हाथ में....

पथराई आंखें सुख की खोज में..!!१!!


नींद उडी, होश उड गया

अपना हर एक दूर गया

सूख गया खेत बरसात में....

पथराई आंखें सुख की खोज में..!!२!!


राह देखकर कामयाबी की

पूरी ना हो सकी बात मन की 

आशा बदलती गयी निराशा में... 

पथराई आंखें सुख की खोज में..!!३!!


हो गयी किस्मत बेजार

बढ गयी मुश्किल हजार

रहा ना काबू मन, मन में....

पथराई आंखें सुख की खोज में...!!४!!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy