Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF
Click here to enter the darkness of a criminal mind. Use Coupon Code "GMSM100" & get Rs.100 OFF

Anita Bhardwaj

Tragedy


4.5  

Anita Bhardwaj

Tragedy


पानी

पानी

1 min 216 1 min 216

पानी भर आया आंख में,

जब गर्भ के अंकुर का पता चला;


फिर पानी आया सोचकर कहीं बेटी

हुई तो सास ना नाराज हो जाए;


बेटी पैदा हो गई तो खुशी का पानी मां की आंखों में,

दुख के पानी से गीली हुई दादी की आंखें,


बड़ी हुई तो सिखाया गया 

पानी पीकर भी गुजारा करना सीखो!


खुद को पानी सा ठंडा कर लो

पानी सा बहाव रखो,


मुंह में जुबान नहीं बस आंखों में पानी रखो,

पानी पानी सी हो गई ज़िन्दगी,


लोगों ने पानी समझ खूब धोए अपने पाप,

फिर पानी मैला है कह मोड़ लिया मुंह;


जब ठहरी रही बांधों के बीच तो पूजते थे,

अपनी मलिनता को मिटाने की खातिर बही;


जब बाढ़ बन निकली तो लोगों ने कहा

इसकी तो आंख का पानी ही मर गया है!!


Rate this content
Log in

More hindi poem from Anita Bhardwaj

Similar hindi poem from Tragedy