STORYMIRROR

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

4  

अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

बदल गया जिया शाख तेरी

बदल गया जिया शाख तेरी

1 min
179

उजड़ जैइयै जब चमन तुम्हारो,

तबहिं याद अईयै दामन हमारो।


कहां लै चलैगो तू कश्ती हमारी,

आगाज़ है अबतौ हस्ती हमारी।


कुछ देर बैठ गया मुंडेर तेरी,

समझ गया क्या चाल तेरी।


अब और न कर तू लतीफी,

बदल गया जिया शाख तेरी। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy