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Akanksha Gupta

Romance Tragedy


5.0  

Akanksha Gupta

Romance Tragedy


प्रेम

प्रेम

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एक अनोखी प्रेम कहानी दुनिया ने ना जानी है

हृदय में प्रेम लिए भटकती एक मीरा दीवानी हैं

विरहन की अग्नि में जलती बीत गई ज़िन्दगानी हैं

सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है


महादेव का उपवास किया था उस कन्या ने सोमवार को

मिल जाये वर उनके जैसा संसार मे उसका मान हो

महादेव के मंदिर की चौखट पर उसने दीये जलाये थें

इसी प्रकाशित रात्रि मे उसने अपने कान्हा के दर्शन पाये थें


उस एक क्षण में उसके जीवन का छुपा हुआ था सार

सम्मोहन में रैना कटी और दिन आया था मंगलवार

प्रेम गीत गुनगुना रहा था उसका कंठ नित बारम्बार

अपने प्रिय की कल्पना में किया था उसने सोलह श्रृंगार


स्वप्न उसकी प्रीत का ले चला उसे इस लोक के पार

उसके कान्हा समक्ष थें उसके कर रहे थे इंतजार

मुख पर मोहक मुस्कान थी सजा हुआ था द्वार

स्वप्न जब पूरा हुआ उसका दिन आया बुधवार


गुरुवार की शीतल हवा ने उसके मन मे अलख जगाई

प्रिय दर्शन की आस में मंदिर तक दौड़कर आई

ढूंढ रही थी प्रियतम को मंदिर के हर कण में अकुलाई

ना मिले कान्हा उसे तो महादेव से गुहार लगाई


उनके दर्शन की आस में उसने अपने नयन बिछाये

शुक्रवार बीत गया मगर उसके प्रियतम ना आये

सूना हुआ मन का कोना कोई पीर समझ ना पाये

अज्ञानी संसार कहे बावरा उसकी हँसी उड़ाये


उसके नयनों में बसी हुई थी पिया मिलन की आस

स्वप्न खंडित हो गए थे उसके मिला था शनि का त्रास

कर्तव्य पालन के लिए कन्हैया ने छोड़ा उसका हाथ

शनिवार की रात्रि में कोई नहीं था उसके साथ


सूर्य के तेज में दमक रही थीं उसकी योगिनी की काया

कान्हा का प्रेम उसे मोह लगे अपना तन लगे माया

रविवार को संसार ने योगिनी को कंठ से लगाया

कान्हा की मीरा बनी उसने विरह को अपनाया


एक अनोखी प्रेम कहानी दुनिया ने ना जानी है

हृदय में प्रेम लिए भटकती एक मीरा दीवानी हैं

विरहन की अग्नि में जलती बीत गई ज़िन्दगानी हैं

सात दिनों के सात रंग में रंगी हुई इसकी प्रेम कहानी है।


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