STORYMIRROR

Anita Bhardwaj

Romance

4  

Anita Bhardwaj

Romance

रंग

रंग

1 min
396

होली में एक रंग हो

तेरे गांव से,

कुछ गुलाल मैं भेजूं

अपने गांव से,

एक दिन ऐसा आए

अपने हाथों से लगाऊं

फिर तेरे रंग में मैं

खुद भी रंग जाऊं!!


गुझिया सी मिठास

भर जाए रिश्ते में

भांग वाली छाछ मेरे

मिठाई तेरे हिस्से में

एक दिन ऐसा आए

अपने हाथों से खिलाऊं

फिर तेरे रंग में मैं

खुद भी रंग जाऊं!!


ऐसा चढ़े रंग

तुझपर मेरे प्यार का,

हर रंग फीका लगे

तेरे आगे संसार का

एक दिन ऐसा आए

अपने हाथो से सजाऊँ

फिर तेरे रंग में मैं

खुद भी रंग जाऊं!!



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance