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Sneha Dhanodkar

Abstract Drama Tragedy

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Sneha Dhanodkar

Abstract Drama Tragedy

मौत

मौत

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मौत, हाँ मौत

जिंदगी का सबसे बड़ा सच

बहुत खूबसूरत होती है ये

हाँ वाकई मे हसीन भी

लोगों को लगेगा

क्या ये मजाक है

नहीं मैं सच कह रही हूँ

देखा है इसे मैंने करीब से 

ये मौत बेहद खूबसूरत होती है

क्योंकि ये सब खत्म कर देती है

ना कोई शिकवा बचता शेष है

ना रह जाती कोई शिकायत बाकी

ना कोई गम साथ जाता है

ना कोई तकलीफ रह पाती

ना पैसे कमाने की जल्दी

ना आगे बढ़ने की होड़

कौन क्या कहेगा

ये प्रश्न भी छूट जाता है पीछे

ना किसी से सवाल बाकी

ना ही कोई देना पड़ता जवाब

यहाँ तक की दुश्मन भी

बन जाता है दोस्त

इस मौत को गले लगाते ही

सब ठीक हो जाता है

कोई आपकी बुराई नहीं करता

कोई कमियाँ नहीं गिनाता

ज़ो भी आता सब

अच्छा ही बोल कर जाता

क्योंकि देखा है मैंने करीब से

मेरे पिताजी का देहावसान

ज़ो बस किसी के लिये थी

एक मौत 

और हमारे लिये जिंदगी

उस लम्हे में मैंने देखा है

मौत को... बहुत करीब से

जिया है उन लम्हों को

तिल तिल कर के

और जाना है की

जाने वाला चला जाता है

बस रख जाती है यादें शेष

पहले सब करते थे बहुत

बुराई उनकी

याद आयी मौत के बाद

अच्छाई उनकी

ऐसे बहुत से लम्हों को

देखा है आते जाते

ये एक आईना है

जिनकी हम सब मूरत है

इसीलिए ये मौत

बहुत खूबसूरत है।।


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