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Jalpa lalani 'Zoya'

Romance

4  

Jalpa lalani 'Zoya'

Romance

यादों के उजाले

यादों के उजाले

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शाम ढले तेरी यादों के उजाले में चली जाती हूँ अक्सर,

शब-ए-हिज़्र में फ़लक के चाँद में तुम्हें पाती हूँ मयस्सर।


शाम-ए-ग़म में बढ़ जाता है इस क़दर तन्हाई का तिमिर,

धुएँ से उभरती तस्वीर तेरी, प्रीत का दिया करती हूँ मुनव्वर।


माज़ी में तेरे साथ बिताए खूबसूरत लम्हात हमें याद आते हैं,

ख़्यालों में आगोश में आकर, तेरी खुश्बू साँसों में लेती हूँ भर।


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