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umme salma

Romance


4.0  

umme salma

Romance


चांद - चकोर

चांद - चकोर

1 min 601 1 min 601

बर्फ के गोले जैसा चांद हर पूनम की रात निकल के आये

दिल में लिए आस प्यारी के चकोर उससे मिलने आये।

मिलन की आस में वो जलता पिगलता हर रात

पर चकोर से अपने ना हो पाती उसकी मुलाकात।

कटकर आधा होगया कोई नहीं है उसके साथ

फिर भी बड़ा वो सुंदर लगता है हर चौदवीकी रात।

सूखकर कांटा होगया है, पिघल के होगया है तार

अब तो आकर मिल लो चकोर दिन बचे हैं सिर्फ चार।

विरह वेदना में पिघल गया चांद, होगया अंबर में लुप्त

इधर उसिकी प्रेम उपासना में चकोर है धर्ती पे विलुप्त।


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