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Akanksha Gupta

Romance

3  

Akanksha Gupta

Romance

चंद्र और चंद्रिका

चंद्र और चंद्रिका

1 min
300


उस अकेली रात में

चमक रहा था चंद्र

छिटक रही थी चंद्रिका

वायु चले मंद मंद


एक रेतीले टीले पर

बैठे थे दो पंछी

कर रहे थे गुफ्तगू

अपने अपने दिल की


पहुंच रही थीं मोहब्बत

अपनी मंजिल की दहलीज पर

हो रहा था नवसृजन सपनों का

नयनों के कपाट पर


उस अकेली रात में

चमक रहा था चंद्र

छिटक रही थी चंद्रिका

वायु चले मंद मंद!



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