यादें
यादें
तेरी यादों को छलकाया है ,बहुत दिन हमने।
दरिया ए अश्क बहाया है, बहुत दिन हमने।।
मेरी खिड़की थी, तेरे दीदार की मुंतज़िर ।
खुद को तन्हा पाया है, बहुत दिन हमने।।
तीरगी रुकने लगी, जब शाम ओ सहर।
बारहा दिल को जलाया है, बहुत दिन हमने।।
कर ही जाती थी तेरी सूरत, मेरे चश्मे तर ।
भूलना क्या, भुलाया है बहुत दिन हमने।।
दर्द की हद थी ,न हद की हिदायत 'मीरा'।
हिज़्र की आग में, जलाया है बहुत दिन हमने।।
खुद को पा लेते ये होश भी ना रहा बाकी ।
इश्क बेखुदी से निभाया है ,बहुत दिन हमने।।
हिज़्र-जुदाई। तीरगी-अंधकार

