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Dr. Madhukar Rao Larokar

Classics

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Dr. Madhukar Rao Larokar

Classics

वह सपना ही तो था

वह सपना ही तो था

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निद्रा में जैसे, सपने आते

सपने में जैसे, तुम दिखते।

कुछ बेगाने से, कुछ अंजाने से

एहसासों को जैसे, सर्द हवायें देते।


वह सपना ही तो था

बेचैनी में जैसे, इजाफा करते

दिल को जैसे, घायल करते।


ना मीठी यादें, ना दिलकश वादे

समीप आते और गुम हो जाते

वह सपना ही तो था।


गुजारी है साथ, जो कुछ रात

कुछ जागती, कुछ सोती आंखों से।

उनमें तुम, तन से साथ थे

मन से ओझल, रहे मेरी आंखों से

वह सपना ही तो था।


सोते हुए एकाएक उठ बैठना

घायल पंछी की तरह तड़पना।

सपना था या थी हकीकत

याद रहा बस तेरा ना होना

वह सपना ही तो था।


कहते हैं, भोर का देखा

सपना होता है सच।

दिखे तुम, बेजान बुत से

'मधुर 'जाने कब होगा सपना सच

वह सपना ही तो था।


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