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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Inspirational

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Inspirational

सूर्यास्त

सूर्यास्त

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इससे पहले कि इस जिंदगी का सूर्यास्त हो 

दिन के उजाले की तरह खुशियां समाप्त हो 


आओ मिलकर प्यार की स्वर लहरियां बिखेरें 

समय के कैनवास पर सत्कर्मों के चित्र उकेरें


गंगा की तरह मन को पावन और निर्मल कर लें 

राग द्वेष छोड़कर विश्व को अपनी बांहों में भर लें 


नफरत की कड़वी बोली छोड़ तराने प्रेम के गुनगुनायें  

मुफ्त की खैरात के बजाय परिश्रम पर भरोसा जतायें 


जब ज्ञात है कि जीवन में सूर्यास्त अवश्यंभावी है 

जिंदगी के चार दिनों पर मौत की कालजयी रातें हावी हैं


इसलिए नेकी और सदाचार के पथ पर चलना होगा 

अपने कर्मों और व्यवहार से गुलाब सा महकना होगा 


जब सूर्यास्त का समय आये तब चेहरे पे मुस्कान हो 

इस तरह से इस जीवन रूपी दिवस का अवसान हो।


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