STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Inspirational

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Inspirational

सूर्यास्त

सूर्यास्त

1 min
344

इससे पहले कि इस जिंदगी का सूर्यास्त हो 

दिन के उजाले की तरह खुशियां समाप्त हो 


आओ मिलकर प्यार की स्वर लहरियां बिखेरें 

समय के कैनवास पर सत्कर्मों के चित्र उकेरें


गंगा की तरह मन को पावन और निर्मल कर लें 

राग द्वेष छोड़कर विश्व को अपनी बांहों में भर लें 


नफरत की कड़वी बोली छोड़ तराने प्रेम के गुनगुनायें  

मुफ्त की खैरात के बजाय परिश्रम पर भरोसा जतायें 


जब ज्ञात है कि जीवन में सूर्यास्त अवश्यंभावी है 

जिंदगी के चार दिनों पर मौत की कालजयी रातें हावी हैं


इसलिए नेकी और सदाचार के पथ पर चलना होगा 

अपने कर्मों और व्यवहार से गुलाब सा महकना होगा 


जब सूर्यास्त का समय आये तब चेहरे पे मुस्कान हो 

इस तरह से इस जीवन रूपी दिवस का अवसान हो।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance