STORYMIRROR

Kanchan Prabha

Fantasy Inspirational

3  

Kanchan Prabha

Fantasy Inspirational

सूर्य के प्रताप से

सूर्य के प्रताप से

1 min
156

मंडप प्रभा जाल लगे

   धरा गोद बाल लगे

कभी हथेली चूमती

   कभी खिले सूर्यमुखी

विधाता ये अजीब सा

   उद्भ्ट प्राण गीत सा

पथिक के पाश बँध कर

   कविता या छन्द कर

किसी के मुख चूम कर

   विश्व पूर्ण घूम कर

डरा नहीं घटा नहीं

   क्षेत्र में बँटा नहीं

जग हुआ महान

   मुग्ध आसमान

सूर्य के प्रताप से

   तिमिर तेज ताप से



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy