सीख लूंगी
सीख लूंगी
दूर रहना मैं भी अब सीख लूंगी,
मतलब के रिश्तो की ना मैं भीख लूंगी।
माना होगा दर्द घुटूंगी भीतर ही भीतर,
तन्हाई में रोकर अंदर ही अंदर चीख लूंगी।
तन्हा होकर मिल जाऊ शायद फिर खुद से,
तेरे सिवा भी शायद आईने में फिर खुद को दीख लूंगी.. ।
