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Khatu Shyam

Classics Others

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Khatu Shyam

Classics Others

खुद को पढ़कर छोड़ देते हैं

खुद को पढ़कर छोड़ देते हैं

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खुद को पड़ते हैं,हम फिर यूं ही पड़कर छोड़ देते हैं,,
एक पन्ना जिंदगी का ऐसे भी हर रोज मोड़ देते है।

 
बड़ी मेहनत से ही माली मैदान गुलिस्तान बनाता हैं,
कुछ लोग गुलों को भी बेवजह तोड़ देते है।


मोहब्बत में सदा मिलना हो ऐसा जरूरी नहीं,, 
 किसी की यादों से भी कुछ अपना दिल जोड़ देते हैं।


कुछ दोस्तो का नफरत करना भी लाजमी हैं हमसे,
मरने के बाद तो सब अच्छाई का कफ़्न ओड़ लेते है
 
नहीं तलब राधे को कि अब कोई जन्नत मिले ,,
कर्म अच्छे कर बाकी लोगो की दुआओं पे छोड़ देते है।
 राधे मंजूषा


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